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General, Purana, Scripture

दिनानां नियमो नास्ति सर्वदा श्रवणं मतम्

दिनानां नियमो नास्ति सर्वदा श्रवणं मतम् – श्रीमद भागवत महात्म्यं, पद्म पुराण उत्तर खण्ड 3.45

शब्दार्थ:

दिनानां दिन में, किसी समय में, नियमोनियम अनुसार, नास्ति नहीं करना पडेगा, सर्वदा  – हर समय श्रेष्ट है, श्रवण सुनने के लिए, मतम् – मेरे सोच एवें मत है

भावार्थल: मेरे मत है की किसी दिन का नियम नहीं है, [इस श्रीमद भागवत का] श्रवण हर समय हो सकता है

ये जो श्रीमद भागवत महापुराण हे, उसका पठन, श्रवण एवं मनन हर समयमे हो सकता हे. जब हमारे जीवनमे अतिशय दुःख आता है उस समयभी यह भागवत का पाठ हो सकता हे. इस श्लोक के वक्ता हे पुरानाकालिक सनत कुमारो, जो ब्रह्मदृष्टा एवं जीनोने भगवान कृष्ण की असीम कृपा प्राप्त की हे.

हमारे जीवन की नया इस संसार के सागरमें अति झोले खाती है, सम्भवभी है के हम दुभ्ही जाये परन्तु जब हम शास्त्र के कवच पहनते हे तब हमारा कौन क्या बिगाड़ सकता हे?

हमारे शास्त्र हर समस्या का समाधान देते है और देते रहेंगे परन्तु हम्मे भी इतनी समज होनि चाहिए के हम वो बात समज सके.

About Makwana

A student of Sanatan Vedic Dharma

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